सुन सकता हूँ मैं वो खामोशियाँ जो कुछ बयां करना चाहती हैं महसूस कर सकता हूँ में वो एहसास जो दिल में ही दम तोड़ रहे हैं हर रोज में अँधेरे के आघोस में तन्हाई की चाहर ओढ़कर सो जाता हूँ इस उम्मीद में कि एक दिन मेरे घर में भी रोशनी आएगी।

में खुद को एक अंजाम तक पहुँचाने के लिए हर रोज एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा हूँ जिसमे जीत भी मेरी है औरहार भी, किसी मजबूर का दर्द बांटना चाहता हूँ ताकि अपना दर्द थोड़ा कम कर सकूँ मेरे हिस्से में जितनी भी ख़ुशी है वो भी में किसी जरुरत मंद को देदेना चाहता हूँ ताकि किसी को तो ख़ुशी मिले क्यों में ये जान चूका हूँ कि ख़ुशी हर किसी के हिस्से में नहीं आती।

बस खुद को जिन्दा रखना है मुझे जब तक में खुद को पूरी तरह न अजमालूं मेरी मौत का किसी को शक न हो इस लिए गहरे शांत दरिया में पत्थर फेंकता हूँ खुद को जिन्दा महसूस कर सकूं। हर रोज कुछ अच्छा होने की उम्मीद लेकर निकलता हूँ घर से लेकिन अच्छा नहीं होता जिंदगी के हर मोड़ पै एक मुसीबत कड़ी मिलती है में फिर भी उससे मुस्करा कर गले मिलता हूँ ये सोचकर कि कोई कमी न रह जाये मुसीबतों की।

हर रोज एक धोखा, जाने पहचानों की साजिस घेर ही लेती है मुझे। हर रोज कुछ अच्छा होने की उम्मीद लेकर निकलता हूँ घर से लेकिन अच्छा नहीं होता जिंदगी के हर मोड़ पै एक मुसीबत कड़ी मिलती है में फिर भी उससे मुस्करा कर गले मिलता हूँ ये सोचकर कि कोई कमी न रह जाये मुसीबतों की। हर रोज एक धोखा, जाने पहचानों की साजिस घेर ही लेती है मुझे। लेकिन में कायरों की तरह हार मैंने वालो में से नहीं हूँ लड़ते लड़ते मर जाने वालों में से हूँ इस लिए मुझे अब डर नहीं लगता और नहीं कोई शिकायत रहती है जो भी मिलता है दर्द या गम उसे अपना बना लेता हूँ और उसी के साथ जीने की कोसिस करता हूँ मुस्कुराने की पूरी कोशिश करता हूँ ताकि कोई मुझे सहानुभूति न दे क्यों की में बेचारा नई बनना चाहता और नहीं किसी की दया भावना को मोहताज हूँ |

Author

Write A Comment