दर्द भरी शायरी

दर्द भरी शायरी

तेरा मुझसे यूँ नफरत करना जायज तो नहीं,
मेरे मुस्कुराते चेहरे से शायद तू वाकिफ नहीं !
तू खुश रहे हमेशा मेरी यही खुदा से इबादत है,
ख़ुशी जरुरी नहीं मेरी तो गम में मुस्कुराने की आदत है !!

गुम है मुझमे मेरे ख्वाबों का बर्बाद शहर,
मौत भी आकर लौट जाती है मेरे दर से
अब कोई असर करता नहीं जहर !!

अपनों की ख़ुशी के लिए अपने वज़ूद की खरोंच को छुपाना पड़ता है,
दिल चीख कर रोता है मगर होंठो को मुश्कुराना पड़ता है !!

दिल की सुर्ख दीवारों पे दर्द का एक निशान खींचा है किसी ने,
नफरतों की जमी से उगता प्यार का पौधा हूँ
जिसे आंसुओं से सींचा है किसी ने !!

कुछ ख्वाब हैं मेरी आँखों में जो मुझे अक्सर सोने नहीं देते,
तकलीफ तो बहुत होती है जीने में, मगर कुछ कर्ज बाकी हैं
जो मेरे जिस्म से मेरी रूह को जुदा होने नहीं देते !
मालूम है मुझे शराफत की कीमत चुकानी पड़ती है यहाँ,
छीन लेते हैं मेरे हिस्से की ख़ुशी, और मुझे रोने भी नहीं देते !!

किसे कहूं अपना ये चहरे फरेबी हैं,
मेरे दुश्मन वही हैं जो मेरे सबसे करीबी हैं !!

तन्हाई महसूस होती है क़यामत की भीड़ है चारों ओर,
किसी को सुनाई नहीं देता मेरी खामोशियों का शोर !!

नफरतों की आग से जल गयी अरमानों की बस्ती मेरी,
जिसने बनाई थी उसी ने मिटा दी हस्ती मेरी !
वख्त की शाजिसें मैं समझ नहीं पाया,
मुझे दरिया की ख्वाहिश थी मगर किनारे पर ही डुब गयी कश्ती मेरी !!

रौशनी रहे उनके घर में मैं चिरागों की तरह जलता रहा,
मौत के करीब मुझे ले आये वो मैं फिर भी उनके पीछे पीछे चलता रहा !!

मेरे बेगुनाह होने की उसने दी है मुझे सज़ा,
ख़ुशी के बदले मुझे नफरते मिली हैं बेवजह !
दफ़न कर दिया मेरी हसरतों को किसी की तमन्नाओं ने,
फिर भी सुकून न मिला उसे ना जाने क्या है उसकी रज़ा !!

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