दिल को छूने शायरी

दिल को छूने शायरी

नमी सी है आज मेरे आँगन की रेत में शायद तू मेरी शायरी पढ़कर रोया होगा,
रात भर जुदा रही नीद मेरी आँखों से शायद तू मेरी यादों से लिपट कर सोया होगा !!

कबसे ढूंढ रहा हूँ मगर मुझे मेरी मंजील का पता नहीं मिलता,
जो शख्स मुझे अपना सा लगता है क्यूँ मुझे उसके लिबाश में वो नहीं मिलता !
घर बनाना चाहता हूँ उसके दिल में मगर, उसके दिल का रास्ता नहीं मिलता !!
ये पूरी कायनात भी मिलकर उसकी कमी पूरी नहीं कर सकती
मेरे दर्द की इंतहां कैसे बयाँ करुँ, अब तो रोने पे आँखों से आंसू नहीं निकलता !!

ऐ कास की तेरा गम मुझे नशीब होता तो मेरी ज़िंदगी में खुशियों की कमी ना होती,
ऐ कास की तेरे दर्द में मेरी आँखें रोई होती तो आज मेरी आँखों में ये नमि ना होती !!

अक्सर रातों में रोती हूँ तेरी यादों से लिपट कर,
सब ख़त्म हो गया बस तेरी याद ही रह गयी है दिल में सिमट कर !!

एक एहशान मुझपे मेरे खुदा कर दे,
उसकी यादों को मेरे दिल से जुदा कर दे !!

ये कैसा शोर है मेरे सीने में शायद कोई उम्मीद टूटी है,
मेरे होंठों पे मुस्कान तो है मगर ये मुस्कान झूठी है !
अजीब इस्तेफ़ाक़ है कि मेरे अल्फाजों को आवाज नहीं मिलती,
कैसे बयां करूँ मेरी दास्ताँ मेरे अल्फाजों से आवाज रूठी है !!

चीन ली तमाम रातों की नीद उसने,
कसूर सिर्फ इतना था की उसका ख्वाब देखा था !!

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