यादों का मतलब वो क्या जाने जो खुद ही यादों को मिटाया करते हैं,
यादों का मतलब उनसे पूंछो जो यादों के सहारे जिंदगी बिताया करते हैं।

अक्सर रातों में रोता हूँ में तेरी यादों से लिपट कर,
सब ख़त्म हो गया सिर्फ याद रह गई दिल में सिमट कर।

एक एहसान मुझपे मेरे खुदा करदे,
उसकी यादों को मेरे दिल से जुदा करदे।

पता ही नहीं चलता कब यादों में रात गुजर जाती है यादों का इतना असर है कि हर चेहरा अजनवी लगता है किसी के आने की खबर ही नहीं होती और न किसी के जाने का पता। बहुत कोसिस करने के बाबजूद भी भुला नहीं सकता उन यादों को ऐसा लगता है कि वो जिंदगी का बहुत अहम हिस्सा है दिमाक दिल को बहुत समझाने की कोसिस करता है लेकिन दिल दिमाक की सुनता ही नहीं है लाख कोसिस करने के बाद भी में यादों को दिल से जुदा नहीं कर सका।

कभी बहुत परेशान होकर कहीं बहुत दूर चला जाना चाहता हूँ लेकिन इस पूरी कायनात में ऐसी कौन सी जगह है जहाँ यादें पीछा नहीं करेंगीं। ऐसा नहीं है कि यादें बहुत तकलीफ देती हूँ सुकून भी देती है तो कभी रुलाती भी हैं। मेरे बजूद शामिल हैं अगर यादेँ नहीं तो में नहीं ऐसा लगता है कि अगर यादों को रोक दिया तो साँस लेना नामुमकिन है। कुछ इसलिए भी यादों रोका नहीं जा सकता क्यों कि उसकी यादों के सिबाय मेरे पास कुछ भी नहीं है उसकी यादों में रोने से ही तो दिल को सुकून मिलता है।

यादों में उसका एहसास है जिसे में महसूस करता हूँ उसकी यादों में वो कसिस है जो मुझे जिन्दा रहने के लिए मजबूर करतीं है जिस पल उसकी याद साथ नहीं होती है ऐसा लगता है जैसे दिल ने धड़कना ही बंद कर दिया हो। लोग जितनी आसानी से कह देते हैं कि भूल जाओ उसे उतना आसान नहीं है भूलना अगर इतना आसान होता तो यादों का कोई मतलब ही नहीं होता। कुछ लोग इसे दिमागी पागलपन कहते हैं मुझे नहीं पता जितना में यादों को जान पाया हूँ इनके बिना जीना सम्भब नहीं है

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