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ज़िंदगी का खौफ

वो कुछ कहना चाहता था लेकिन ख़ामोशी ने उसे इस कदर जकड़ा हुआ था कि चाहकर भी उसके होंठ कुछ बयां नहीं कर पाए, कुछ टूट सा गया था उसके सीने में दर्द इतना ज्यादा था कि उसकी रूह चीख रही थी लेकिन उसकी आवाज किसी को सुनाई नहीं दे रही थी, उसके वजूद में एक तड़प थी जिसे बर्दास्त करना आसान नहीं था। वो खुद को इतना ज्यादा तन्हा महसूस कर रहा था कि ये करोड़ों की भीड़ मिलकर भी उसका अकेलापन दूर नहीं कर सकती थी रात के गहरे सन्नाटे में वो अपनी ही परछाई को देखने के लिए तरस गया था। उसकी आँखों में टूट चुके सपनों के टुकड़े बेरहमी से चुभ रहे थे उसकी धड़कन ठहर जाना चाहती थी वो इतनी घुटन महसूस कर रहा था कि सांस लेना भी मुश्किल था लेकिन जिंदगी अभी उसे अपनी कैद से आजाद नहीं करना चाहती थी। वो इतना बेबस था की ज़िंदगी उसे रास नहीं आ रही थी और मौत उसे गले नहीं लगाना चाहती थी अक्सर लोगों को मौत का खौफ होता हैं लेकिन उसे जिंदगी से खौफ था। इंसान को सबसे ज्यादा तकलीफ अधूरी मोहब्बत और अधूरे ख्वाव देते हैं उसकी न मोहब्बत मुकम्मल हुई न ख्वाब, सब कुछ खो दिया था उसने बचपन में फैमिली जवानी में मोहब्बत और सारे दोस्त जीने का आखिरी सहारा कैरियर भी ख़त्म हो चूका था मोहब्बत के नाम पर उसे बार बार तोड़ा गया था वो बहुत हार महसूस कर रहा था लोगों की बेवजह की नफरत और फरेब ने उसे इतना तोड़ दिया था कि सारी हिम्मत को समेट कर भी जीने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था और मौत उसे नशीब नहीं हुई। वो सारी रात बिस्तर पर जिंदगी के खौफ से तकिये में मुंह दे कर रोता रहा उसका पूरा बदन आग की तरह जल रहा था अब उसकी आँखों में आंशू भी नहीं बचे थे उसके दर्द का अंदाजा लगाना नामुमकिन था। न जाने ऐसे ही कितनी रात और कितने दिन वो अपनी करारी हार के साथ जिंदगी से खौफजदा होकर पल पल मरता रहा लेकिन सुकून की एक बूँद भी उसे नशीब नहीं हुई उसका दिल और दिमाक मर चुका था अगर कुछ बाकी था तो उसकी चलती फिरती लाश।

 

 

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