साहेंब वो कहानी मुस्कुराहटों कि,मैं दर्द का किस्सा कोई,

मज़ाक ग़र होती ये जिंदगी कसम से मैं भी हँसता बहुत ……

बेहतर है कि अब कुछ ना लिखुँ,तूम मुझको बिना पढ़े हि रहने दो,

मैं तनहा हूँ मुझें तनहा छोड़ दो गर मैं बुरा हूँ तो मुझसे रिश्ता तोड़ दो,

मेरी आँखे छलक रही है मुझे तो अपने पत्थर होने पे नाज़ था ?

आप जाइए कोई बात नही यूँ हि आ गए आँसू शायद ऑखों मे कोई फॉस चुभी हो ??

साहेंब बस दो ही लफ्ज़ कहने है मुहोंब्बत है इंतज़ार है,

आईना देखकर तसल्ली हुई मुझ को भी यहाँ जानता है कोई……..

हमेशा फूलों की तरह अपनी आदत से बेबस रहिये,

तोडने वाले को भी खुशबू की सजा देते रहिये,

साहेंब बताओ है कि नहीं मेरे ख्वाब झूठे,

कि जब भी देखा तुझे अपने साथ ही देखा ????
“इतनी सी बात है…मुझे तुमसे प्यार है”…..

मुझे तेरा साथ जिंदगी भर नहीं चाहिये

बल्कि जब तक तुम साथ हो तब तक जिंदगी चाहिये,

दिल भर ही गया है तो मना करने मे डर कैसा,

मुहोंब्बत मे बेवफाओ पर कोई मुकदमा थोडे होता है ??

साहेंब साफ कह दो बस मौसमी मुहोंब्बत है,

क्यू ये रोज़ रेत के घरोंदे सा बिखरा के चल देते हो ????

कसमें वादे,ख़ूब जिसने किये वों शख्स अब नहीं दिखता,

एक मुकम्मल सी याद़ बाकी है एक अधुरे इश्क के बाद,

तूने फैसले ही फासले बढ़ाने वाले किये,

वरना कुछ नही था तुझसे करीब मेरे…..

काश कि काश तू भी बेचैन होकर कह दे कभी कि…

मैं भी तन्हा हूँ,तेरे बिन तेरी तरह तेरी कसम तेरे लिए……..

गम मुफ्त में नही मिलते किसी को,

हाँ तेरे जैसा हमसफर होना ज़रूरी है,

मैं हमदर्दी की खैरातों के सिक्के मोड़ देता हूँ,

कि जिस पे बोझ बन जाऊ उसे मैं छोड़ देता हूँ,

मैने तो बस इतना ही पूछा था मैं याद हूँ या नही,

वो मुस्कुरा के बोली यही तो हमे पता नही,

मुहब्बत में गुस्सा और शक वही करता है

जिसमें मुहब्बत कूट कूट कर भरी होती है

मेरी रुसवाई कर के नाख़ुश हैं,उसके चेहरे की सियाही ये है,

मेरे होने से ख़फ़ा हैं कुछ लोग, मेरे होने की गवाही ये है,

साहेंब निभाई गई नहीं उससे मुहोंब्बत,

अधूरा अब हाल पूछने का तमाशा किया करते है……

साहेंब अब छोड़ दी वो मुहोंब्बत

जिस मुहोंब्बत के पीछे उसकी मुहोंब्बत नहीं मतलब था……

साहेंब तुमसे कुछ कह ना पाना

ख़ुद से चुप हो जाने जैसा है…..

वक्त मिले कभी तो कदमों तले भी देख लेना,

बेकसूर अक्सर वहीं पाये जाते हैं,

साहेंब मुझे मेरे बाद महसूस किया जायेगा खुशबू कि तरह,

मैं कोई शोर नही जो सुनाई दूगॉ…….

हम एक-दुसरे को बड़ी अच्छी तरह से पहचानते थे कभी,

तन्हा छोड़ जाने की ख़्वाहिश तुम्हारी ना जाने कैसे ना जान सका कभी,

साहेंब ख़ुदा ना बदल सका आदमी को आज भी,

और अब तक आदमी ने सैकड़ों ख़ुदा बदल डाले…..

कौन कहता है कि ये दुनिया प्यार से चलती है,कौन कहता है ये दुनिया दोस्ती से चलती है,

आज़मा कर तो देख ये दुनिया तो सिर्फ मतलब से चलती है,

हम कभी साथ हो नही सकते

उसके यही आखरी लफ्ज़ दिल चीर देते हैं,

साहेंब ज़ाया ना कर अपने अलफाज किसी के लिए


खामोश रह कर देख तुझे समझता कौन है ????

कौन कहता है कि सिर्फ नफ़रतो में हि दर्द होता है,

कभी हद से ज्यादा मुहोंब्बत भी बहोत तकलीफ देती है,

साहेंब दर्द के लम्हें कब मुझ पर आसान बने,

जो दर्द ऑसु ना बन सके वो तूफ़ान बने……

तुम्हारी आवाज़ सुनने को हर पल बेक़रार रहता हूँ,

नहीं करूँगा याद तुम्हें मैं खुद से हर बार कहता हूँ,

पलकों को जब-जब आपने झुकाया है,बस एक ही ख्याल दिल में आया है,

कि जिस खुदा ने तुम्हें बनाया है,तुम्हें धरती पर भेजकर वो कैसे जी पाया है।

साहेंब ढूढ़ता था हर जगह पाया पता तेरा नहीं,

अब पता पाया जो तेरा तो पता मेरा नहीं……

मैंने ये कब कहा कि मेरे हक़ में हो जवाब

लेकिन खामोश क्यूँ है तू कोई फैसला तो दे ??

जिन्दगी भर दर्द सहना है सोचता हूँ तो मुस्कुरा देता हूँ,

बातें धुँए सी फैल गई हर तरफ मेरी,खामोशियों की आग दबी ही पडी रही,

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